मुद्रा बाज़ार क्या हैं? इतिहास, विशेषताएं,उद्देश्य एव कार्य l What are money markets? History, Features, Objectives and Functions

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ABC limited का अपने व्यापारिक कार्यों जैसे सेल्स ,एडवरटाइजमेंट कार्यों और यहां तक की अपने स्टाफ को सैलरी का भुगतान करने के लिए शॉर्ट टर्म फाइनेंस की जरूरत है आप यहां पूछ सकते हैं ए बीसी लिमिटेड के पास और भी पैसे होंगे वह इसका इस्तेमाल क्यों नहीं करते हैं वह इसका इस्तेमाल इसलिए नहीं करते क्योंकि इसलिए नहीं करते वह इस फंड को निवेश और व्यापार बढ़ाने के लिए अलग से रखा है

उन्होंने यह निर्णय लिया है क्यों है मनी मार्केट के माध्यम से पैसा लेंगे क्योंकि इस माध्यम में सबसे कम ब्याज का भुगतान करना पड़ता है जब भी किसी लेनदेन के समय पैसा 1 साल के अंदर लौटना पड़ता है तो उसे शॉर्ट टर्म इंजेक्शन के नाम से जाना जाता है

जब कोई भी कंपनी एक कंपनी दूसरी कंपनी को पैसा उधार देती है तो उसे DEBT इन्वेस्टमेंट के रूप में जाना पड़ता है मनी मार्केट के साधन कम जोखिम वाले निवेश हैं दिन में पैसा रातों-रात से लेकर एक साल के अंदर लौटाना पड़ता है

मुद्रा बाज़ार के प्रकार

मनी मार्केट दो प्रकार के होते हैं

1.मनी मार्केट अकाउंट

2.मनी मार्केट फंड

1. मनी मार्केट अकाउंट

एक डिपॉजिट अकाउंट की तरह होता है जैसे बैंक या कोई भी फाइनेंशियल संस्थानों में खोला जा सकता है ये सेविंग अकाउंट्स के समान है और यह इस तरह ismein ek minimum balance rakhna padta hai यह निवेश करने के लिए बहुत ही सुरक्षित माध्यम है

उदहारण मान लीजिए यूएस के एक मनी मार्केट अकाउंट मैं आपके पास $10000 है जिस बैंक में वह अकाउंट खोला गया है वह अगर सिक्योरिटीज में आपका धन को निवेश करता है और किसी कारण से वह आपका नुकसान हो जाता है तो FDIC आपकी जमा राशि को वसूल करेगा और बचाएगा इन कामों में रिस्क बहुत ही कम होता

2. मनी मार्केट फंड

मनी मार्केट फंड म्यूच्यूअल फंड के समान है निवेशक अपने पोर्टफोलियो के जोखिम को कम करने के लिए इनमें निवेश करता है निवेशक अपने अकाउंट में पैसा जमा करने के बजाय वह लाभ कमाने के लिए इनके साथ निवेश करता है मनी मार्केट फंड में निवेश कंपनी द्वारा निवेश किया जाता है और नुकसान की स्थिति में मूलधन की कोई गारंटी नहीं होती है

मुद्रा बाज़ारों का इतिहास

मुद्रा बाज़ार का इतिहास बहुत पुराना है जो निम्न प्रकार से हे

1.वस्तु विनिमय एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से जरूरत का सामान का लेन देन करता है जैसे किसी किसान के पास गेहूं की बोरिया है तो वह उसके बदले कोई दूसरा समान ले सकता है

2.धातु के लिए उत्पाद यह वस्तु विनिमय के समान इसको बदला गया है जिसमे लोग धातु के लिए सामानों का आदान-प्रदान करते थेउत्पादों के बदले तांबा, लोहा और यहां तक कि एल्यूमीनियम भी बेचे जाते थे। लेकिन सबसे लोकप्रिय धातु निश्चित रूप से सोना और चांदी थे। इस लोकप्रियता ने इन्हें मानक धातु बना दिया

3.सोने की मानक 19 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक सोने की तुलना में स्थानीय मुद्रा को मापना एक सामान्य बात हो गई। इसे ही सोने की मानक प्रणाली के रूप में जाना जाता था।

4.ब्रेटन वुड्स यह प्रणाली 1940 और 1970 के दशक के बीच उपयोग में आई। इस प्रणाली में दुनिया की सभी मुद्राओं को अमेरिकी डॉलर की तुलना में मापा जाता था। और अमेरिकी डॉलर को सोने की कीमत की तुलना में मापा जाता था। इसने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा के आसान एक्सचेंज का रास्ता तैयार किया।

5.बाज़ार संचालित जब 1970 के दशक में ब्रेटन वुड्स प्रणाली भी खत्म हो गई तो बाज़ार ने हमेशा की तरह इस पर कब्ज़ा कर लिया। आज हर चीज की तरह, बाज़ार की ताकतें, एक मुद्रा की तुलना में दूसरी मुद्रा का मुल्य निर्धारित करती हैं। और इतिहास को देखते हुए, यह प्रणाली पिछले सभी तंत्रों में से सबसे स्थिर लगती है

मुद्रा बाजार के उद्देश्य क्या हैं?

मुद्रा बाज़ार के मुख्य उद्देश्य नीचे दिए गए हैं

1.आरबीआई मुद्रा बाजार को नियंत्रित करता है। इसलिए, इसके बदले में, अर्थव्यवस्था में तरलता के स्तर को विनियमित करने में मदद मिलती है।

2.यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार दोनों के लिए सरकारी क्षेत्र के लिए वित्त का एक बहुत महत्वपूर्ण स्रोत है। और इसलिए, बैंकों को अपने अधिशेष धन को जमा करने का अवसर प्रदान करता है।

3.यह धन को प्रभावी निवेश में बदलने की क्षमता रखता है इस तरह, ऋणदाता और उधारकर्ता दोनों लाभ में होते हैं।

मुद्रा बाज़ारों की विशेषताएं

मुद्रा बाजार की मुख्य विशेषता

1.ओवर-द-काउंटर बाज़ार

विदेशी मुद्रा बाज़ार में लेनदेन को इलेक्ट्रॉनिक रूप से ओवर-द-काउंटर पर, कंप्यूटर नेटवर्क के माध्यम से, दुनिया के विभिन्न हिस्सों से जुड़े व्यापारियों और लेन-देन पार्टियों के बीच किया जाता है।

2.मुद्राओं के जोड़े में होने वाला ट्रेड

भारत और दुनिया में, मुद्रा व्यापार हमेशा जोड़े में होता है। उदाहरण के लिए USD-INR मुद्रा जोड़ी में USD यानी अमेरिकी डॉलर आधार मुद्रा/ बेस कंरेंसी है (जो आप खरीदते हैं) और INR यानी भारतीय रुपए भाव मुद्रा/ कोट करेंसी है (जो आप बेचते हैं)। इसलिए जब आप USD-INR जोड़ी खरीद रहे हैं तो आप सही में USD खरीद रहे हैं और भारतीय रुपया बेच रहे हैं। इसके विपरीत जब आप USD-INR जोड़ी बेच रहे हैं, तो आप USD बेच रहे हैं और भारतीय रुपया खरीद रहे हैं।

3. 24 घंटे खुला

यह विदेशी मुद्रा बाज़ार की एक और विशेषता है। यह सप्ताह के साढ़े पांच दिन, चौबीसों घंटे खुली रहती है। इस अवधि के दौरान लंदन, न्यूयॉर्क, टोक्यो, ज्यूरिख, फ्रैंकफर्ट, हॉन्गकॉन्ग, सिंगापुर, पेरिस और सिडनी में कई प्रमुख वित्तीय केंद्रों में मुद्राओं का कारोबार किया जाता है। आपने देखा कि ये शहर अलग-अलग समय क्षेत्रों में स्थित

मुद्रा बाज़ार के कार्य

मुद्रा बाजार के निम्नलिखित मुख्य कार्य हैं:

1.व्यापार, उद्योग-धंधे और कृषि में पैसे लगाने के लिए रुपए की आवश्कता की पूर्ति करना

2.रुपए देने वाले अथवा लेने वाले के बीच में दलाल के रूप में काम करता है

3.जो व्यापारी अपने धंधे को एक स्तर से दूसरे स्तर व बढ़ने के लिए जिसको पूंजी की जरूरत होती है वह एक दूसरे से संपर्क करते हैं अथवा बाज़ार मुद्रा के बारे में बार करते हैं

4.छोटी से छोटी धन राशि को बचा कर एक बड़े पैमाने पर धन को एकत्रित करते हैं वह उस जमा राशि को किसी प्रोडक्ट में निवेश करते हैं

मुद्रा बाज़ार उपकरण क्या हैं?

मुद्रा बाजार का तात्पर्य यह है कि इसको बडी आसानी से नगदी में बदला जा सकता है जो निवेशक की जरूरत नगदी आवश्कता को पूरा कर सके मुद्रा बाजार उपकरण काम काउंटर पर किया जाता है इसे काम को बाज़ार के अनुभवी दलालों और मनी मार्केट म्यूचुअल फंड्स के अंतर्गत किया जाता है

भारत में मुद्रा बाज़ार लिखतों के प्रकार

कई प्रकार के मुद्रा बाजार उपकरण उपलब्ध हैं, उनमें से सभी का मुख्य उद्देश्य कुल उत्पादन क्षमता व देश की जीडीपी को बढ़ावा देना है

मुद्रा बाज़ार उपकरणों की सूची इस प्रकार है

1.जमा का प्रमाण पत्र

किसी भी संगठन को पैसे उधार देना जमा प्रमाण पत्र के आधार पर किया जाता है

2.वाणिज्यिक पत्र

मुद्रा बाजार के उपकरण किसी कंपनी द्वारा पैसे जुटाने के लिए तैयार वचन के रूप में काम करता है यह पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं है इसका उपयोग बडी संस्था और कंपनियों द्वारा ही किया जाता है

3.ट्रेजरी बिल

यह किसी देश की केंद सरकार द्वारा तभी जारी किए जाते हैं जब उनको किसी कार्य के लिए धन की जरूरत होती है ये ब्याज उत्पन्न नही करती निवेशक के धन को लाभ देने का दावा करते हैं और फिर इसको अपनी दर पर बेचा जाता है यह सब एक निश्चित समय पर ही किया जाता है

4.समझौता फिर तैयार करो

इसमें उपयोग एक उधारकर्ता के रूप में किया जाता है जिसको लेकर लाभ कमाने के बाद वापस पैसे देने का दावा करते हैं

5.बैंकर की स्वीकृति

कारोबार के लिए पैसे लेने के लिए बाज़ार मुद्रा को प्राप्त करने के लिए बैंकर स्वीकृति और हस्ताक्षर की गारंटी ली जाती है जो पैसे लौटाने के प्रूफ के रूप में होती है और फिर पैसे देती है

मनी मार्केट म्यूचुअल फंड्स को निवेश के रूप में चुन सकते हैं ये एक ब्याज कमाने का ओपन एंडेड फंड है जो कम समय में ज्यादा ब्याज उठाने और कम जोखिम वाले निवेश के रूप में काम करता है

मुद्रा बाजार में सही समय पर निवेश करना होता है जब बाज़ार में उतार चढाव हो तब निवेश करता अच्छा होता है इससे अच्छे रिटर्न की आशंका जताई जाती है

मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स के फायदे और नुकसान क्या हैं?

मनी मार्कट इंस्ट्रूमेंट्स के फायदे एव नुकसान

मार्केट इंस्ट्रूमेंट के फायदे

1.ये अधिक ब्याज दरों वाले बैंक खाते के जैसे है हम इन फंड्स में कम जोखिम वाली स्थिति के कारण बचत खाते की तुलना में मनी मार्केट फंड, म्यूचुअल फंड्स काफी अच्छी तरह और जायदा ब्याज देता है

2.इन फंड को बैंक खाते की तरह एक दिन में नगदी को निकाला जा सकता है

3.फंड्स के साथ उनसे होने वाली कमाई को भी आसानी से देखा जा सकता है या खुद की निगरानी में रखा जा सकता है

4.एसईआई यह दावा करता है कि मार्कट मनी को अपने आजमाए हुए और उसकी पूरी जानकारी प्राप्त होने के बाद ही उपकरणों में पैसे निवेश करना चाहिए उसके पास निवेश का सम्पूर्ण रिकॉर्ड होना चाहिए

5.कम जोखिम वाली स्थिति के कारण इसकी ब्याज प्रवृति धीरे धीरे बढ़ती जाती है जो अच्छा रिटर्न देती है

मार्कट इंस्ट्रूमेंट् के नुकसान

1. अधिक तरलता का मतलब अस्थिरअवसर भी है ये पैसे जिन उपकरणों में निवेश करते हैं उन्हें उनके समय के दौरान वापस निकाल लिया जाता है या रद्द कर दिया जाता है जिसे मनी मार्केट फंड को व्यर्थ कर सकता है जिसमे आप भी मनी खो सकते हैं

2. निवेश कंपनी अपने फंड की स्थिति बदलना चाहती है तो कई मार्कट फंड्स निवेश राशि को लॉक्ड करने का ऑप्शन उठा सकते हैं या फिर ऐसे भी कर सकता है की अपनी सम्पूर्ण राशि को निकाल सकता है या उसे कुछ समय के लिए वही रहने दे सकता है

3. धीरे कमाई करने वाली मार्कट फंड्स अपने पैसे को बढ़ने के इंतजार का मतलब म्यूचुअल फंड्स की प्रक्रिया से चूकना l जो बहुत जल्दी से तेज ब्याज कमा सके जिससे आपकी निवेश राशि कुछ वर्षो में डबल हो सकती है

4. इन फंडों का बीमा नहीं किया जाता है। बैंक खातों और सावधि जमाओं के लिए, FDIC प्रति ग्राहक $250,000 तक का बीमा प्रदान करता है। इसका बीमा इसलिए नही होता क्योंकि फंड्स सुरक्षित नहीं होता है कंपनी निवेश का सम्पूर्ण प्रबंधन नही कर पाती है

5. इसमें उच्च रिटर्न संभव है अगर निवेश लेखों को अक्सर विनियमित नहीं किया जाता है तो ये फंड मुद्रास्फीति को मात देने में सक्षम नहीं हो सकते हैं। लंबी अवधि के लिए, फंड उच्च रिटर्न अर्जित कर सकता है, लेकिन पैसे के समय मूल्य को देखते हुए, यह रिटर्न के निचले स्तर पर हो सकता है।

FAQ

मुद्रा कौन जारी करता है?

भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक केंद्रीय सरकार की तरफ से करेंसी नोट जारी करता है।

मुद्रा बाजार का नियमन कौन करता है?

आरबीआई भारत में मुद्रा बाजार और बैंकिंग नियामक है

मुद्रा कितने प्रकार के होते हैं?

मुद्रा – प्रणाली कसौटी मुद्रा का तीन प्रकार से वर्गीकरण करती है: 1. धातु मुद्रा; 2. कागज मुद्रा; और 3. साख मुद्रा

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